हेलो फ्रेंड्स, आज के इस लेख में मैं आपको बताऊंगी कि हमारे भारत में कितने प्रकार के लोन होते है? यानि How Many Types of Loans are There in India? अगर आपको नहीं पता है की हमारे भारत में कितने प्रकार के लोन होते है और वह क्या क्या है तो फिर इस लेख को पूरा पढ़े क्यूंकि इस लेख में मैं आपको लोन के बारे में सारी चीजे बताने वाली हूँ।
किसी चीज को खरीदने के लिए, किसी जरुरी काम को करने के लिए, बिज़नेस को बढ़ाने के लिए या किसी पर्सनल काम के लिए बैंक या किसी फाइनेंसियल इंस्टीटूशन से ली जाने वाली फाइनेंसियल हेल्प को ही लोन या फिर कर्जा कहा जाता है, जिसके बदले में बैंक या किसी फाइनेंसियल कंपनी को EMI के रूप में ब्याज के साथ लोन का पूरा अमाउंट वापस कर देते है।
आज के लेख में आप जानेंगे की इंडिया में बैंक्स या फाइनेंसियल इंस्टिट्यूट कितनी तरह की लोन प्रोवाइड करते है।
भारत में कितने प्रकार के लोन होते है? - How Many Types of Loans are There in India?
टाइम पीरियड के हिसाब से लोन 3 तरह के होते है -
- शार्ट टर्म लोन - इसमें पैसे लौटाने का समय 1 साल से कम का होता है।
- मीडियम टर्म लोन - इसमें पैसे लौटाने का समय 1-3 साल के बीच का होता है।
- लॉन्ग टर्म लोन - इसमें पैसे लौटाने का समय 3 साल से ज्यादा का होता है।
भारत में बैंक और फाइनेंसियल इंस्टिट्यूट कितने प्रकार के लोन प्रोवाइड करते है
1. पर्सनल लोन (Personal Loan): पर्सनल लोन का मतलब होता है खुद के लिए लिया हुआ लोन। वैसे तो लोन सब खुद के लिए ही लेते हैं लेकिन पर्सनल लोन का मतलब होता है कि अपने पर्सनल कामो के लिए लोन लेना, जैसे की बच्चों की स्कूल फीस भरनी हो, किसी का इलाज कराना हो, किसी को महंगी गिफ्ट देनी हो या फिर घर का कोई सामान वगैरा लेना हो।
पर्सनल लोन के लिए हर बैंक की एक अलग-अलग ब्याज दर तय होती है, जैसे की आज के समय में पर्सनल लोन के लिए स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया यानि SBI Bank 12.50% - 16-60% तक सालाना इंटरेस्ट वसूल रहा है, HDFC Bank 10.99% - 20.75% तक सालाना इंटरेस्ट वसूल रहा है।
यह भी जान लेना जरुरी है कि पर्सनल लोन की व्याज दर दूसरे लोन के मामलों में ज्यादा होती है। वैसे बैंक आपको पर्सनल लोन देते समय ज्यादा डॉक्यूमेंट नहीं मांगते है, वह बस आपकी सैलेरी देखते है और लोन को इशू कर देते है। पर्सनल लोन आपको 5 साल तक के लिए मिल सकता है।
2. गोल्ड लोन (Gold Loan): गोल्ड लोन बैंक में गोल्ड रखने के बदले में केस लेने वाला प्रोसेस होता है। आपको गोल्ड बैंक की लॉकर में रखना पड़ता है। इस तरह के लोन आपको जमा किये गए लोन की क्वालिटी और प्राइस पर मिलते है। बिहैवियर में यह देखा गया है कि कि बैंक आपको गोल्ड की कीमत के 80% तक लोन दे देते है।
गोल्ड लोन आमतौर पर लोग अपने जरुरत के कामो को पूरा करने के लिए लेते है। इस लोन पर लिया जाने वाला ब्याज दर पर्सनल लोन की तुलना में काफी कम होता है।
आज की समय में स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया गोल्ड लोन पर 11.15% सालाना इंटरेस्ट वसूल रहा है जबकि HDFC बैंक 10% तक इंटरेस्ट वसूल रहा है।
3. सिक्यूरिटी के बदले में मिलने वाला लोन (Security Loan): इसमें बैंक आपके सिक्यूरिटी पेपर कको रखकर लोन देता है, मगर सवाल यह उठता है कि सिक्यूरिटी पेपर क्या होते है? अगर आपने बिमा शेयर, म्यूच्यूअल फंड्स, इन्सुरेंस स्किम, बोंड में पहले से ही इन्वेस्ट किया हुआ है तो यही आपके सिक्यूरिटी पेपर्स होते है जिसके बदले में बैंक आपको लोन दे देता है। इन पेपर की वैल्यू होती है।
अगर आप लोन चुकाने में असमर्थ होते यानि नहीं दे पाते है तो बैंक आपके सिक्यूरिटी पेपर को हड़प लेता है और बाजार में बेच देता है। आप इन सिक्यूरिटी पेपर को बैंक में गिरवी रख सकते है। बैंक आपको इन पेपर के आधार पर ओवर ड्राफ्ट की फैसिलिटी देता है।
ओवर ड्राफ्ट का मतलब होता है कि जितने पैसे आपके अकाउंट में है उससे ज्यादा पैसे निकालने की सुविधा। अगर आपके अकाउंट में जीरो बैलेंस है तब भी आप अपने अकाउंट से पैसे निकाल सकते है इसी को ओवर ड्राफ्ट कहा जाता है।
4. प्रॉपर्टी लोन (Property Loan): प्रॉपर्टी के लोन वह लोन होता है जो बैंक आपको प्रॉपर्टी के कागज गिरवी रखकर देता है और यह ज्यादा से ज्यादा 15 साल तक के लिए मिल सकता है। आमतौर पर प्रॉपर्टी की जो कीमत होती है उसका 40% - 60% तक लोन मिल जाता है।
5. होम लोन (Home Loan): घर खरीदने के लिए जो लोन लिया जाता है वह होम लोन कहलाता है। आप सिर्फ घर बनाने के लिए ही लोन नहीं लेते है बल्कि आप घर बनाने की कीमत, मकान का रजिस्ट्रेशन इन सब खर्चे के लिए बैंक से लोन ले सकते है।
बैंक आपके खर्चे का फुल राशि का 75% -80% तक लोन दे सकती है। बाकि पैसो का जुगाड़ आपको घर बनाने के लिए खुद ही करना पड़ता है।
मान लिजिये की आपने एक प्लाट के लिए लोन लिया जिसकी कीमत 6 लाख है, तो बैंक को आप सिर्फ 6 लाख का 30% यानि 1 लाख 80 हजार रूपए देंगे और बाकि की रकम आप धीरे-धीरे चुकाते रहेंगे।
होम लोन चुकाने का टाइम पीरियड 5-20 साल तक के लिए हो सकता है। होम लोन के शर्तो में ब्याज के अलावा कुछ फीस भी शामिल होती है, जैसे प्रोसेसिंग फीस, अड्मिनिस्ट्रेटिव चार्जेज, लीगल फीस, असिस्मेंट फीस इत्यादि।
6. एजुकेशन लोन (Education Loan): हर स्टूडेंट के नसीब में नहीं होता है कि वह मनचाहे इंस्टिट्यूट में पढाई कर पाए। कोई ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में पढाई करे तो उसे पैसे की दिक्कत आ सकती है। वहां की फीस ही इतनी है कि वहां जाकर पढाई के बारे में सोचना काफी मुश्किल है। ऐसे वक्त में वह बैंक से एजुकेशन लोन के लिए अप्लाई कर सकता है।
बैंक एजुकेशन लोन देने से पहले उसकी रीपेमेंट सिउर करता है। देखा गया है कि लोन सिर्फ उन ही स्टूडेंट्स को दिया जाता है जो इसे वापस करने की कैपिसिटी रखते है। स्टुडेंट्स की कैपिसिटी की जाँच बैंक 2 तरह से करते है, या तो उनके गार्जियन के इनकम को देखा जाता है या फिट लकॉन लेने वाले स्टूडेंट्स किसी यूनिवर्सिटी में जा रहें है, वहां से पढ़कर वह कमाएंगे या नहीं कमाएंगे, वहां कैंपस सिलेक्शन का रसिअल क्या है? यह सब देखकर ही बैंक लोन को अप्रोवे करती है।
पढाई खत्म होने के बाद स्टूडेंट रीपेमेंट कर सकता है। एजुकेशन लोन लेने के लिए एक गारेंटर की भी जरुरत पड़ती है। गारेंटर लोन लेने वाले के गार्जियन या फिर रिश्तेदार भी हो सकते है।
आज के समय में SBI 7.50 लाख से ऊपर एजुकेशन लोन के लिए 10.70% और 7.50 लाख लोन के लिए 9.95% इंटरेस्ट चार्ज कर रहा है।
7. वाहन या कार लोन (Car Loan): बैंक अक्सर कार खरीदने के लिए लोन के तौर पर तरह-तरह की स्किम देते रहते है। यह लोन बाकि दूसरे लोन के की तरह जी अलग-अलग समय के लिए फिक्स्ड या फिर फ्लोटिंग रेट पर दिए जाते है।
फिक्स्ड रेट का मतलब होता है फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट। जब आप लोन ले रहे होते है तो उस समय जो ब्याज दर लागु होती है वहीं ब्याज दर पुरे लोन को चुकाने तक लागु रहती है।
फ्लोटिंग रेट वह होता है जो समय आने पर बदल भी सकती है, कम या ज्यादा भी हो सकती है और उसी के हिसाब से आपके लोन का भी रेट कम या ज्यादा होता है।
बैंक आपको लोन देने से पहले यह पूछ लेती है कि आप फिक्स्ड रेट पर लोन लेना चाहते है या फिर फ्लोटिंग रेट पर लोन लेना चाहते है। जब तक लोन का पूरा का पूरा पैमेंट नहीं हो जाता तब तक कार पर मालिकाना अधिकार लोन देने वाली बैंक का ही होता है। आपको बैंक में अपनी सैलेरी स्लीप और पिछले 2 या 3 साल का इनकम टैक्स रिटर्न जमा कराना पड़ सकता है, इसके अलावा कोई आईडी प्रूफ या अड्रेस प्रूफ भी आपको जमा कराना होता है।
8. कॉर्पोरेट लोन (Corporate Loan): बैंक जब किसी बड़े खिलाडी जैसे नीरव मोदी, विजय मालिया, अम्बानी, टाटा बिरला वगैरा जैसे लोगों को लोन देता है तो उसे कॉर्पोरेट लोन कहते है। अभी के नियमों के अनुसार बैंक अपनी कोर कैपिटल का 55% तक किसी एक बड़ी कंपनी को लोन दे सकती है।
तो फ्रेंड्स आज के इस लेख में आपने जाना कि इंडिया में बैंक्स या फाइनेंसियल इंस्टीटूट्स कितनी तरह का लोन प्रोवाइड कराते है? अगर आपको यह लेख भारत में कितने प्रकार के लोन होते है? - How Many Types of Loans are There in India? पंसद आया तो इसे शेयर करिये और अगर आपको इस लेख से सम्बंधित कोई प्रश्न है तो आप निचे कमेंट में पूछ सकते है।

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